चंडीगढ़, 15.03.26-, टैगोर थिएटर — 55वें अखिल भारतीय भास्कर राव नृत्य एवं संगीत सम्मेलन के समापन दिवस पर विश्वविख्यात बांसुरी वादक पंडित रोनू मजूमदार के मनमोहक बांसुरी वादन तथा बनारस घराने के प्रख्यात तबला वादक पंडित कुमार बोस की प्रभावशाली संगत ने दर्शकों को सुर और ताल की अनुपम दुनिया में मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात पंडित नयन घोष और ईशान घोष की बेजोड़ तबला जुगलबंदी ने सम्मेलन के अंतिम दिन को विशेष रूप से यादगार बना दिया। टैगोर थिएटर में आयोजित इस संगीतमय संध्या में दर्शकों ने कलाकारों की अद्वितीय प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया।

इस अवसर पर केंद्र के चेयरमैन श्री एस. के. मोंगा, सीनियर वाइस चेयरमैन प्रो. अरुण ग्रोवर, एसएनए अवार्डी गुरु डॉ. शोभा कौसर तथा सचिव श्री सजल कौसर एवं डॉ समीरा कौसर भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के मुख्य कलाकार पद्मश्री से सम्मानित और गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक पंडित रोनू मजूमदार भारत के सबसे प्रतिष्ठित बांसुरी वादकों में से एक हैं। उन्हें विश्वभर में पीढ़ियों-दर-पीढ़ियों बांसुरी को लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है। एक ‘स्टाइल-मेकर’ के रूप में प्रसिद्ध पंडित मजूमदार ने रागों की प्रस्तुति की एक विशिष्ट शैली विकसित की है, जिसमें ध्रुपद गायकी और जटिल लयकारी का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उनके इसी योगदान ने समकालीन भारतीय शास्त्रीय और लोकप्रिय संगीत में बांसुरी को एक प्रमुख वाद्य के रूप में स्थापित किया है। प्रसिद्ध अमेरिकी संगीतकार राय कूडर ने उन्हें “भारतीय बांसुरी का डॉ. फीलगुड” कहकर संबोधित किया था, जो उनकी अंतरराष्ट्रीय ख्याति का प्रमाण है।

बनारस घराने के सुप्रसिद्ध तबला वादक पंडित कुमार बोस ने अपने पिता आचार्य विश्वनाथ बोस तथा महान तबला सम्राट पंडित किशन महाराज से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। अपनी स्पष्टता, गहराई और लय की बारीकियों के लिए विख्यात पंडित बोस एक उत्कृष्ट संगतकार होने के साथ-साथ प्रभावशाली एकल कलाकार भी हैं। इस संध्या में उन्होंने पंडित रोनू मजूमदार के साथ तबले की संगत कर कार्यक्रम में विशेष ऊर्जा और आकर्षण भर दिया।

दूसरी ओर पंडित नयन घोष, जो तबला और सितार दोनों के ही अप्रतिम कलाकार हैं, उन्हें भारतीय संगीत का ‘चलता-फिरता विश्वकोश’ माना जाता है। वे पद्मभूषण पंडित निखिल घोष के पुत्र एवं शिष्य तथा महान बांसुरी वादक पन्नालाल घोष के भतीजे हैं। लगभग छह दशकों के अपने लंबे संगीत जीवन में उन्होंने यूरोप, अमेरिका, कनाडा, एशिया और ऑस्ट्रेलिया सहित विश्व के अनेक देशों में अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया है।

युवा और प्रतिभाशाली तबला वादक ईशान घोष पंडित नयन घोष के पुत्र और पंडित निखिल घोष के पोते हैं। बचपन से ही कठोर साधना और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले ईशान घोष एक सशक्त एकल कलाकार और कुशल संगतकार के रूप में प्रतिष्ठित हो चुके हैं। उन्होंने पंडित जसराज, उस्ताद अमजद अली खान, पंडित रोनू मजूमदार सहित अनेक दिग्गज कलाकारों के साथ मंच साझा किया है।

इनके साथ संगत में साबिर खान, जो सारंगी के एक जाने-माने कलाकार हैं, सीकर घराने से ताल्लुक रखते हैं। वे पद्म भूषण उस्ताद सुल्तान खान के बेटे और उस्ताद गुलाब खान के पोते हैं। बचपन से ही संगीत की तालीम पाने वाले साबिर ने लगभग दो दशकों तक उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के साथ संगत की है। इसके अलावा, उन्होंने ताल-वादक अनीश प्रधान और सत्यजीत तलवलकर के साथ-साथ भारती प्रताप के साथ भी काम किया है, जिसमें उन्होंने वाद्य और गायन परंपराओं का सुंदर मेल प्रस्तुत किया है।
संध्या के प्रथम चरण में पंडित रोनू मजूमदार ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत राग जयजयवन्ति से की, जिसमें उन्होंने आलाप, बंदिशें और विभिन्न गतों के माध्यम से राग की सुंदरता को विस्तार दिया। उन्होंने ने राग हंसध्वनि में सुसज्जित बंदिशों से भी दर्शकों को सराबोर किया। उनके बांसुरी वादन में गायकी अंग की विशेष छाप दिखाई दी, जिसने श्रोताओं को गहरे भावलोक में पहुंचा दिया। इसके उपरांत धमार का प्रदर्शन करके दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम का समापन उन्होंने एक खूबसूरत कजरी से किया। उनकी बांसुरी की मधुर और भावपूर्ण ध्वनियों से पूरा सभागार संगीतमय हो उठा। इस प्रस्तुति में पंडित कुमार बोस की तबले पर बखूबी थिरकती उंगलियों ने वातावरण को और भी जादुई बना दिया।

इसके पश्चात मंच पर पिता-पुत्र की जोड़ी पंडित नयन घोष और ईशान घोष की शानदार तबला जुगलबंदी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। तीनताल में प्रस्तुत उनकी जुगलबंदी में उठान, आलाप, गत, कायदे और रेले की प्रभावशाली प्रस्तुति ने श्रोताओं से भरपूर तालियां बटोरीं। पारंपरिक बंदिशों के साथ तबले की दमदार थाप और दोनों कलाकारों के अद्भुत समन्वय ने वातावरण को ऊर्जावान बना दिया। इस प्रस्तुति में सारंगी पर उस्ताद सुल्तान साबिर खान ने संगत कर कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया, जिससे पूरा सभागार संगीत के रस में डूब गया।

कार्यक्रम के अंत में शाम के विशिष्ट अतिथियों ने सभी कलाकारों को सम्मानित किया। केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर ने इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने के लिए मीडिया, दर्शकों, कलाकारों तथा उनकी टीम का हार्दिक आभार व्यक्त किया। इसी के साथ इस वर्ष के इस विराट सांस्कृतिक उत्सव का भव्य समापन हुआ। आयोजकों को इस सफल और यादगार आयोजन के लिए हार्दिक बधाई ।