चण्डीगढ़, 14 मई- संसार के भौतिक सुख क्षणभंगुर होते हैं, जबकि सत्गुरु की कृपा से प्राप्त होने वाला आनंद स्थायी, दिव्य एवं “परमानंद” स्वरूप होता है। यही कारण है कि संत महापुरुष सदैव गुरु भक्ति, समर्पण और विनम्रता को जीवन का मूल आधार बताते आए हैं। जब मनुष्य अपने अहंकार, इच्छाओं एवं शिकायतों का त्याग कर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ स्वयं को ईश्वर एवं सत्गुरु के चरणों में समर्पित कर देता है, तब उसे न केवल सांसारिक सुख, बल्कि आत्मिक शांति एवं परमानंद की अनुभूति भी प्राप्त होती है, ये प्रेरणादायक विचार आज सैक्टर-30 स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन में सत्गुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज की पावन स्मृति में आयोजित “समर्पण दिवस” निरंकारी सन्त समागम के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए यहां के जोनल इंचार्ज श्री ओ.पी. निरंकारी ने व्यक्त किए।
श्री निरंकारी ने आगे कहा कि सच्चा समर्पण किसी भय, दबाव, स्वार्थ अथवा बाहरी प्रदर्शन से नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रेम और विश्वास से उत्पन्न होता है। जब मनुष्य यह अनुभव कर लेता है कि उसका अस्तित्व तथा समस्त सृष्टि निरंकार की कृपा का ही परिणाम है, तभी उसके भीतर वास्तविक समर्पण की भावना जागृत होती है।
श्री निरंकारी ने कहा कि सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के प्रति हमारी वंदना केवल शब्दों या औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह हमारे व्यवहार, आचरण और जीवन शैली में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। गुरु कृपा से मनुष्य के भीतर प्रेम, विनम्रता, सहनशीलता और सेवा भाव का विकास होता है। सत्गुरु के चरणों से जुड़कर व्यक्ति के जीवन के बंद पड़े भाग्य द्वार भी खुल जाते हैं तथा वह निराशा से निकलकर सकारात्मकता, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठता है।
गुरु-शिष्य संबंध की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह संबंध अत्यंत पवित्र, अटूट एवं आत्मिक होता है। गुरु केवल मार्गदर्शक ही नहीं, बल्कि माता-पिता के समान होते हैं, जो अपने शिष्य को आध्यात्मिक ज्ञान देकर जीवन की सही दिशा प्रदान करते हैं। जब शिष्य गुरु की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करता है, तभी उसका जीवन वास्तव में सफल, सार्थक एवं धन्य बनता है।
इससे पूर्व अनेक वक्ताओं एवं श्रद्धालुओं ने सत्गुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के जीवन, व्यक्तित्व एवं उनकी शिक्षाओं पर आधारित गीत, कविता, विचार एवं भाषण प्रस्तुत कर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। पूरा समागम श्रद्धा, प्रेम, सेवा एवं मानव एकता के संदेश से ओत-प्रोत भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुआ।