मनीमाजरा : नगर प्रशासन द्वारा मनीमाजरा का नाम बदलकर ‘सेक्टर-13’ किए जाने के बावजूद क्षेत्र की जमीनी हकीकत अब भी बदहाल बनी हुई है। मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि करीब 3 लाख की आबादी वाला यह क्षेत्र प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है और यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय, चेयरमैन सुभाष धीमान और प्रधान श्याम सुंदर ने संयुक्त रूप से कहा कि मनीमाजरा और मौलीजागरां क्षेत्र ने नगर निगम को 4 निर्वाचित और 1 मनोनीत पार्षद दिया है, लेकिन इसके बावजूद इलाके के विकास की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और नगर निगम को तत्काल क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।

*एनओसी नीति से लोग परेशान

एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि नगर निगम की एनओसी प्रक्रिया लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है। मकानों से जुड़े जरूरी कार्य, मालिकाना हक और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं एनओसी के अभाव में अटकी हुई हैं। लोगों को रोजाना निगम कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा।

*कॉलेज और आईटीआई की मांग तेज

सुभाष नगर की समाज सेविका कमलेश देवी, पूजा रॉय और मौली जागरा के समाजसेवी पास्टर रॉबर्ट विलियम ने कहा कि क्षेत्र में सरकारी डिग्री कॉलेज और आईटीआई की भारी कमी है। इसका सबसे अधिक असर छात्राओं पर पड़ रहा है, जिन्हें पढ़ाई के लिए दूर-दराज क्षेत्रों में जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा और उच्च शिक्षा को ध्यान में रखते हुए मनीमाजरा में कॉलेज और आईटीआई का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।

*बस शेल्टर नहीं, यात्री परेशान

मनीमाजरा सेक्टर-13 से रोजाना हजारों लोग बसों के माध्यम से सफर करते हैं, लेकिन सुभाष नगर और इंदिरा कॉलोनी में बस क्यू शेल्टर तक उपलब्ध नहीं हैं। गर्मी, सर्दी और बारिश में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को खुले में घंटों बसों का इंतजार करना पड़ता है।

*खेल मैदान के अभाव में सड़क पर खेल रहे बच्चे

एसोसिएशन ने कहा कि 3 लाख की आबादी के बीच बच्चों और युवाओं के लिए एक भी आधुनिक खेल मैदान नहीं है। बच्चे सड़कों और गलियों में खेलने को मजबूर हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। युवाओं के खेलों से दूर होने के कारण नशे और गलत गतिविधियों की ओर बढ़ने की आशंका भी जताई गई।

*स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति खराब

मनीमाजरा के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों, स्टाफ और मेडिकल सुविधाओं की भारी कमी बताई गई। गंभीर मरीजों को सेक्टर-16 अस्पताल या पीजीआई रेफर किया जा रहा है, जबकि कई परिवार निजी अस्पतालों का खर्च उठाने को मजबूर हैं।

*कानून-व्यवस्था और बिजली के तार बने खतरा

एसोसिएशन ने क्षेत्र में बढ़ती चोरी और असामाजिक गतिविधियों पर चिंता जताते हुए पुलिस बल और गश्त बढ़ाने की मांग की। वहीं बाजारों और रिहायशी इलाकों में नीचे लटक रहे बिजली और केबल तारों को जानलेवा बताते हुए कहा गया कि इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। CPDL की ऑनलाइन शिकायत प्रणाली में सेक्टर-13 का विकल्प न होने की बात भी उठाई गई।

*सफाई व्यवस्था ध्वस्त, सार्वजनिक सुविधाओं का अभाव

एसोसिएशन के अनुसार, इलाके में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं और मोटर मार्केट की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है। पार्कों की स्थिति खराब है, वॉशरूम गंदे पड़े हैं और आवारा पशुओं का आतंक बना हुआ है। इसके अलावा तोड़े गए मकानों का मलबा लंबे समय से सड़कों और खाली प्लॉटों में पड़ा हुआ है।

शास्त्री नगर और अन्य क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल तथा सार्वजनिक शौचालयों की कमी भी प्रमुख समस्या बताई गई। बूथ मार्केट क्षेत्र में कॉलोनी बसने के बाद भी सार्वजनिक शौचालय नहीं बनाए गए।

*“नाम बदलने से नहीं, सुविधाएं देने से बनेगा सिटी ब्यूटीफुल”

एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने कहा,
“कोई भी शहर सिर्फ ‘सेक्टर-13’ या ‘सिटी ब्यूटीफुल’ लिख देने से सुंदर नहीं बनता। शहर वहां रहने वाले लोगों को मिलने वाली सुविधाओं और उनके जीवन स्तर से सुंदर बनता है। प्रशासन ने मनीमाजरा को सौतेले व्यवहार के साथ छोड़ दिया है।”

*प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग

मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन ने चंडीगढ़ प्रशासन, नगर निगम कमिश्नर और संबंधित विभागों से मांग की है कि वे जमीनी स्तर पर हालात का निरीक्षण करें और एनओसी समस्या, शिक्षा संस्थानों, बस शेल्टर, खेल मैदान, सफाई, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध करवाएं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वह आगे आंदोलनात्मक कदम उठाने को मजबूर होगी।