DHARAMSHALA-26.07.26-आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते कार्बन उत्सर्जन और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर बढ़ती निर्भरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में हिमाचल प्रदेश सरकार की सौर ऊर्जा भविष्य की सबसे भरोसेमंद और टिकाऊ ऊर्जा के रूप में ग्रीन पंचायत योजना उभरकर सामने आई है। इस योजना के साथ मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खु के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार इस प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में हरित ऊर्जा आधारित विकास का नया मॉडल विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश की 100 ग्राम पंचायतों में 500 किलोवाट क्षमता के ग्राउंड-माउंटेड सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। प्रत्येक परियोजना पर लगभग दो करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इन संयंत्रों से प्रतिवर्ष लगभग प्रति संयत्र आठ लाख यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा। इससे प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को नई गति मिलेगी। यह बिजली न केवल ऊर्जा उत्पादन का माध्यम बनेगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।
ग्रीन पंचायत की इस पहल के तहत जिला कांगड़ा के लंज के समीप गुब्बर (परगोड) में सौर ऊर्जा संयत्र स्थापित किया जा चुका है। यह परियोजना वर्तमान में कमीशनिंग के अंतिम चरण में है और शीघ्र ही बिजली उत्पादन शुरू करेगी।
विश्व बैंक के सहयोग से ग्रीन पंचायत हिमाचल प्रदेश में संचालित यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करने और सामाजिक कल्याण के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
इस योजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसका राजस्व साझाकरण मॉडल है। ग्रीन पंचायत मॉडल में आय का लाभ सीधे स्थानीय समुदाय तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। परियोजना से प्राप्त राजस्व का 20 प्रतिशत हिस्सा हिमाचल प्रदेश सरकार को, 30 प्रतिशत राशि हिमऊर्जा को, परियोजना के संचालन, रखरखाव और प्रबंधन के लिए दिया जाएगा। शेष 50 प्रतिशत राशि सीधे सामाजिक और सामुदायिक विकास पर खर्च होगी। इसमें 25 प्रतिशत संबंधित ग्राम पंचायत के विकास कार्यों के लिए निर्धारित किया गया है, जिससे सड़क, पेयजल, स्वच्छता, सामुदायिक भवन, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य विकास कार्यों को गति मिल सकेगी। वहीं शेष 25 प्रतिशत राशि उसी पंचायत के अनाथ बच्चों और विधवा महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए उपयोग की जाएगी। इस प्रकार यह परियोजना ऊर्जा उत्पादन के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
परियोजनाओं को सरकारी भूमि पर स्थापित किया जा रहा है जिससे निजी भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता समाप्त होगी और परियोजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी तथा सुगम तरीके से किया जा सकेगा। ग्रीन पंचायत पहल केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई सोच को भी जन्म देती है। पंचायतों को नियमित आय प्राप्त होने से वे विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू कर सकेंगी। दूसरी ओर, समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को स्थायी आर्थिक सहयोग मिलने से सामाजिक सुरक्षा को भी नई मजबूती मिलेगी। इस मॉडल से यह संदेश भी जाता है कि विकास तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
हिमउर्जा के परियोजना अधिकारी अरूण भारद्वाज ने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार की कांगड़ा की ग्राम पंचायत गुब्बर में 500 किलोवाट का सोलर पावर प्लांट लगाया जा रहा है, जिसके लिए लगभग 20 कनाल भूमि का उपयोग किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में परियोजना का स्थापना कार्य अंतिम चरण में है। इस परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख यूनिट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। उत्पादित बिजली का हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के साथ हुए समझौते के तहत विक्रय किया जाएगा, जिससे नियमित आय प्राप्त होगी। अरूण भारद्वाज ने बताया कि इस परियोजना से संबंधित पंचायत को प्रतिमाह लगभग एक लाख रुपये की आय होने का अनुमान है, जिससे पंचायत को विकास कार्यों के लिए स्थायी आर्थिक संसाधन उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे कई सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किए जा रहे हैं। जिला कांगड़ा में भी 15 से 20 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने कहा कि प्रदेश सरकार की ग्रीन पंचायत पहल अब धरातल पर उतर चुकी है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। कांगड़ा जिले की ग्राम पंचायत गुब्बर (परगोड़) में 500 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया हैै।
इस परियोजना से पंचायत को प्रतिवर्ष होने वाली आय पंचायत और हिमऊर्जा के बीच निर्धारित राजस्व साझाकरण माॅडल के तहत साझा की जाएगी तथा पंचायत को मिलने वाली राशि स्थानीय विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। जो भूमि पहले अनुपयोगी पड़ी थी, उसी पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। इससे एक ओर प्रदेश के बिजली उत्पादन में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर पंचायत को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, जिससे विकास कार्यों को गति मिलेगी।
आने वाले समय में जिले के लगभग प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की चयनित पंचायतों में हिमउर्जा के माध्यम से 500 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। यह पहल दोहरे लाभ वाली साबित होगी। एक ओर हिमाचल प्रदेश के हरित ऊर्जा राज्य बनने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर पंचायतों को स्थायी आय का स्रोत उपलब्ध होगा, जिससे ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलेगी।