चंडीगढ़.14.07.17- डॉ. राजीव कपिला का आयुर्वेद उपचार पद्दति में एक जाना माना नाम है। उन्होंने पटियाला के गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज से बी.ए.एम.एस. गोल्ड मैडल से और बाद में यहीं से एमडी की परीक्षा उत्तीर्ण की। पढ़ाई पूरी होने के पश्चात धन्वंतरि आयुर्वेदिक कॉलेज में लेक्चरर के पद पर नियुक्त हुए।  सन् 1997 में आयुर्वेदिक एमओ का कार्यभार संभाला। सन् 2002 में आयुर्वेदिक के ड्रग इंस्पेक्टर के  साथ- साथ आयुर्वेदिक के ड्रग कंट्रोलर, नेशनल आयुर्वेदिक मिशन के स्टेट के एसएमओ और रेमेडीज एक्ट के तहत झोला छाप  की चेक टीम के मेंबर जैसे उच्च पदों की शोभा बढ़ा रहे हैं।  डॉक्टर कपिला को पढ़ने का काफी शौक है उन्होंने  मेडिकल के प्रति अपने रुझान के अंतर्गत डिप्लोमा इन हॉस्पिटल मैनेजमेंट और एडवांस  डिप्लोमा इन नेचुरोपैथी आदि का अध्ययन भी किया। डॉ. राजीव कपिला  नेशनल आयुष मिशन से भी जुड़े हैं और चंडीगढ़ के नोडल ऑफिसर है
     डॉ. राजीव कपिला ने  डॉ. विनोद कुमार को बताया कि  मरीजों का आयुर्वेद की तरफ लगातार रुझान बढ़ रहा है। लोग आयुर्वेद दवाइयों पर भरोसा करते हैं।
     डॉक्टर कपिला को उनकी सराहनीय कार्यों के लिए कई बार सम्मानित किया जा चुका है। 26 जनवरी 2016 को तत्कालीन पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी द्वारा राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया।  पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री पवनकुमार बंसल  ने भी समाज में उत्कृष्ट योगदान देने हेतु अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस से नवाजा था। रियल फ्लेवर द्वारा वर्ष 2016 में  इंडियन आइकोनिक अवार्ड प्रदान किया। डॉक्टर कपिला के कई मेडिकल पर लेख पत्र- पत्रिकाओं में छप चुके हैं
    उन्होंने बताया कि कई लोग अव्यवस्थित एवं असंतुलित खान-पान के कारण बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। उनके यहां अधिकतर रोगी जोड़ों के दर्द, चर्म रोग,  एलर्जी,  मधुमेह, रक्तचाप आदि का उपचार कारवाने के लिए पंजाब, हरियाणा हिमाचल और चंडीगढ़ से अधिक संख्या में रोगी आते हैं उन्होंने बताया कि उनके जहां इन सभी बीमारियों का मुफ्त इलाज किया जाता है तथा दवाइयां भी निशुल्क वितरित की जाती हैं। डॉक्टर राजीव कपिला ने बताया कि उनके औषधालय में एक औषध वाटिका भी है जिसमें स्टीविया, अश्वगंधा पिपली, कल्पतरु, कचनार, सुहांजन, अकरकरा, वच,  ब्रह्मी आदि पौधे एवं जड़ी बूटियां लगाई गई है।
        इसका मुख्य उद्देश्य इन्हें लोगों को  दिखाकर इनकी पहचान करवाना है  ताकि लोग इसका ज्ञान लेकर अपने दैनिक जीवन में प्रयोग कर सकें। डॉक्टर कपिला ने बताया कि ऋतु के अनुकूल आहार - बिहार करना चाहिए।  रोगियों को उचित समय में अपना इलाज कराना चाहिए।  आयुर्वेदिक दवाइयों का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। इसके रिजल्ट भी अच्छे  हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए  संतुलित आहार लेना चाहिए। अपने खानपान में मैदा डाइट और जंक फूड न करें।  हो सके तो चाय, काफी शराब और सिगरेट आदि का सेवन कदापि न करें। डेंगू और स्वाइन फ्लू से बचने के लिए गिलोय का निरंतर प्रयोग करें। इससे रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ जाती है। तथा डेंगू, स्वाइन फ्लू, चिकनगुनिया आदि रोगों से बचाव रहता है।  घृतकुमारी अर्थात एलोवेरा का प्रयोग भी करना चाहिए।
       हृदय संबंधी रोगों के  इलाज के लिए अर्जुन की छाल लाभदायक है। विजयसार का उपयोग मधुमेह रोगियों के लिए रामबाण के समान है। स्टीविया के 2- 4 पत्ते लेने से डायबिटीज से काफी राहत मिलती है। जोड़ों का दर्द और गठिया के लिए सुहांजन की फली इस्तेमाल करनी चाहिए।
      निर्गुंडी पत्तों का इस्तेमाल किसी भी चीज करना चाहिए। किसी भी चीज को इस्तेमाल करने से पहले उसके बारे में जानकारी लेना बड़ा जरूरी है ताकि उसे सही मात्रा में लिया जा सके। उन्होंने बताया कि असाध्य रोगों का इलाज पंचकर्मा के द्वारा भी किया जाता है। आयुर्वेद और पंचकर्मा पद्धति से हर तरह के रोगियों के रोगों का इलाज संभव है। डॉक्टर कपिला ने बताया कि चंडीगढ़ और उसके आसपास गांवों में कई झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक चलाते हैं। उनकी टीम द्वारा समय-समय पर डॉक्यूमेंट्स  का निरीक्षण किया जाता है। यहाँ तक कि बोगस डिग्री वाले डॉक्टर्स को  पुलिस के साथ मिलकर अरेस्ट भी करवाया जाता है। उन्होंने रोगियों को सलाह दी कि ऐसे लोगों से अपना उपचार करवाकर जान को जोखिम में न डालें।  डॉक्टर कपिला ने बताया कि सेक्टर-37 की डिस्पेंसरी को अपडेट करते हुए  नेचुरोपैथी और योगा सेंटर खोला जा रहा है। इसी क्रम में सेक्टर 34 की डिस्पेंसरी को अपग्रेड करके 50 बिस्तरों का आयुष हॉस्पिटल में परिवर्तित किया जा रहा है। यह कार्य लगभग 2 वर्ष तक पूरा होने की सम्भावना है। आयुष कॉलेज एंड एजुकेशन इंस्टिट्यूशन मनीमाजरा में शुरू होगा इसका प्रोजेक्ट पास हो चुका है। स्वास्थ्य ही धन है। इस कहावत को चरितार्थ करने के लिए 28 गवर्नमेंट स्कूलों में योगा इंस्ट्रक्टर रखे गए हैं जो  चंडीगढ़वासियों को प्रातः 5:00 से 6:00 बजे तक फ्री योगा सिखाते हैं। काफी संख्या में लोग इसका लाभ ले रहे  हैं। उन्होंने बताया कि इसे धीरे धीरे बढ़ा कर सौ स्कूलों तक किया जाएगा। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि व्यस्त समय में भी कुछ लम्हें शरीर के लिए निकालना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्षम नहीं है तो उसे अपना विकास कर असंभव है।