Chandigarh,19.11.17-आज लोग पौष्टिक आहार को कम फास्ट फूड या जंक फूड को ज्यादा तवज्जों देने लगे हैं। लेकिन जंक फूड हमारी जिंदगी को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं इसका किसी को अंदाजा ही नहीं है। एक शोध की माने तो जंक फूड खाने से दिमाग में गड़बड़ी पैदा होने लगती है। वडा-पावसमोसापिज्‍जा, बर्गररोलचाऊमिन, चिली पटेटोफैंच फ्राइज़ और कोलड्रिंक आदि ने लोगों के खानपान पर कब्ज़ा कर लिया है। 

ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें शेमराक नामक प्ले स्कूल (Shemrock Play School) के पाठ्यक्रम में खासी कमियां पाई गयी हैं गौरतलब है की प्री-नर्सरी व नर्सरी में पढने वाले २ से ४ वर्ष के बच्चों को कक्षा में “बी फॉर बर्गर” सिखाया जा रहा है व इनकी कुछ किताबों के पृष्ठों पर फ्रेंच फ्राइज़, आईसक्रीम व बर्गर की तस्वीरें भी साफ़ साफ़ देखी जा सकती हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार जहाँ स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल “ग्रीन बुक” के पेज नंबर २८ पर एक छोटे बच्चे को आईसक्रीम खाते हुए और पेज नंबर ३२ पर गिनती सीखाने के लिए २ बर्गरों को दर्शाया गया है वहीँ “पिंक बुक” के पेज नंबर ९८ परफ्रेंच फ्राइज़ की तस्वीर मौजूद है। इसके अतिरिक्त “ब्लू बुक” खोलते ही दुसरे पन्ने पर एक बड़ा सा बर्गर भी दर्शाया गया है जिससे छोटे-छोटे बच्चों को “बी फॉर बर्गर” पढाया जा रहा है 

शेमराक प्ले स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट (http://www.shemrock.com) के अनुसार १९८९ में स्थापित इस स्कूल की भारत के अलावा नेपाल व बांग्लादेश में कुल मिलकर ६२५ से अधिक शाखाएं हैं व ३ लाख से भी ज्यादा अभिभावकों ने अभी तक अपने बच्चों को यहाँ पढाया है। अब सवाल ये उठता है की इतना पुराना और प्रतिष्ठित स्कूल होने के बावजूद भी अभी तक स्कूल मैनेजमेंट का इस और ध्यान क्यों नहीं गया और क्या अभी तक छोटे-छोटे बच्चों को यही शिक्षा प्रदान की गयी

इस सब पर लोगों का सीधा सा सवाल है कि शेमराक स्कूल अपने यहां पढने वाले नन्हे-मुन्हे बच्चों को ऐसे कंटेंट से आखिर सिखाना क्या चाह रहा है। बच्चे तो स्कूल में जो सीखते हैं वहीं मांगेगे भी और यही सब चीज़ें बच्चों की सोच का हिस्सा बन जायेंगी। ऐसी स्थिति में बच्चों की ज़िद के आगे मजबूर होकरअभिभावकों को न चाहते हुए भी उन्हें ये सब जंक फ़ूड खरीद कर देना ही पड़ेगा। कुछ अभिभावकों ने तो दबी आवाज़ में इस किताब को विषय पाठ्यक्रम में शामिल करने वाले पर भी सवाल उठाये हैं कि ऐसी किताब को स्वीकृति कैसे दे दी गई।

इसी तरह कुछ समय पहले सीबीएसई बोर्ड की बारहवीं के फिजिकल एजुकेशन की किताब का कंटेंट सामने आया था जिसमें लिखा है कि जिन लड़कियों का फिगर 36,24,36 होता है वो सबसे बेस्ट होती हैं। यह किताब बारहवीं के बच्चों को पढा़ई जा रही है। इसके बाद से सोशल मीडिया पर बखेड़ा खड़ा हो गया है। लोगों ने ताबड़तोड़ ट्वीट-रीट्वीट व कमेंट कर शिक्षा के नाम पर इससे अश्लीलता परोसी जाने की बात कही। वहीं एक-दो ने इसे सही माना और कहा कि इसमें गलत ही क्या है। जबकि अधिकांश तौर पर लोगों ने इसे निशाने पर लिया और कड़े शब्दों में निंदा करते हुये एचआरडी मिनिस्टर से तत्काल कार्रवाई की मांग की। कईयों ने तो बोर्ड को फटकार लगाते हुये कहा कि जाने क्या-क्या बच्चों को सिखाया जा रहा है।

अभी हल ही में डीयू की बीकॉम ऑनर्स की एक किताब में छात्रों को सलाह दी गयी है कि वह स्कर्ट की तरह छोटा ईमेल लिखें जिससे रचि बनी रहे। इसे लेकर विवाद पैदा हो गया था इस किताब के प्रकाशन को एक दशक से ज्यादा हो चुका है। इसमें कहा गया है ईमेल संदेश स्कर्ट की तरह होने चाहिये। इतना छोटा हो कि उसमें रचि बनी रहे और लंबा इतना हो कि सभी महत्वपूर्ण बिंदू इसमें शामिल हो जायें