चण्डीगढ, 2 फरवरी, 2018: चण्डीगढ ब्र्रांच के संयोजक ने बताया कि दिल्ली में  निरंकारी सत्गुरु माता सविन्दर हरदेव जी महाराज के सान्निध्य में एक विशेष सत्संग कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें सन्त निरंकारी मण्डल तथा संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री जय राम दास ‘सत्यार्थी’ जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके तप और त्याग से भरे जीवन से प्रेरणा प्रात्त की गई। ‘सत्यार्थी’ जी 86 वर्ष की आयु में 29 जनवरी को ब्रह्मलीन हुए थे।

                उन्होने आगे बताया कि संत निरंकारी मिशन के प्रति ‘सत्यार्थी’ जी के महान योगदान का उल्लेख करते हुए सत्गुरु माता सविन्दर हरदेव जी महाराज ने कहा कि उनका जीवन सदा ही प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि तकरीबन 70 वर्ष पहले जब वह मिशन में आए तो कालकाजी से साईकल पर आकर सेवा करते थे। कई बार दिन में दो-तीन चक्कर भी लग जाते थे। उन्होंने मिशन की अनेक रूपों में सेवा की। उन्होंने मिशन को बहुत ही गहराई से समझा और जीया यहाँ तक कि यदि मिशन की विचारधारा के बारे में कहीं किसी को भी शंका हुई तो उसे ‘सत्यार्थी’ जी से ही बात करने के लिए कहा जाता था। ‘सत्यार्थी’ जी मिशन के संबंध में हर प्रश्न का उत्तर थे।

सत्गुरु माता जी ने कहा कि बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के समय में ‘सत्यार्थी’ जी अक्सर उनकी कल्याण यात्राओं के दौरान साथ-साथ रहते थे और खाने का समय हो या सोने का, उनकी यही कोशिश होती थी कि पहले सभी खाना खा लें और सोने का प्रबंध हो जाए, अपने लिए सबके बाद सोचते थे।

श्रद्धांजलि समारोह में प्रमुख वक्ताओं में केन्द्रीय योजना तथा सलाहकार बोर्ड के उपाध्क्ष श्री के.आर.चड्ढा जी, संत निरंकारी मण्डल के प्रचार विभाग के मेम्बर इंचार्ज श्रीमती राज वासदेव सिंह जी, प्रेस एवं पब्लिसिटी, इंटरनेट और प्रकाशन विभाग के मेम्बर इंचार्ज श्री कृपा सागर जी, लुधियाना के ज़ोनल इंचार्ज श्री एच.एस. चावला जी तथा इंग्लैण्ड से आए श्री एच.एस. उपाशक जी सम्मिलित थे।

सभी ने ’सत्यार्थी’ जी के बहुपक्षीय व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए उन्हें मिशन के महान विचारक, प्रचारक तथा लेखक के रूप में प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ’सत्यार्थी’ जी का सौभाग्य था कि वह शहनशाह बाबा अवतार सिंह जी, बाबा गुरबचन सिंह जी, बाबा हरदेव सिंह जी और अब सद्गुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के करीब रहे और उनकी कृपा के पात्र बने रहे। उन्होंने हर बार सद्गुरु को समझने का प्रयास किया और उनके विचारों को गहन रूप से ग्रहण किया। उन्होंने अपने इस विशाल अनुभव को पुस्तकों का रूप देकर संत निरंकारी मिशन के साहित्य के प्रति बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान दिया। ’अंधकार से प्रकाश की ओर’, ’शहनशाह’, ’जीवंत शिक्षक’, ’गुरदेव हरदेव’, ’कुलवंत’ और ’माँ तुझे सलाम’ उनकी ऐसी पुस्तकें हैं जो हिन्दी के अलावा देश की कई अन्य भाषाओं में निरंकारी जगत में निरन्तर पहुंच रही हैं।

’सत्यार्थी’ जी के ब्रह्यलीन होने का समाचार पाकर मिशन के अनेक श्रद्धालु भक्त उनके अंतिम दर्शनों के लिए आने शुरू हो गए। अतः ’सत्यार्थी’ जी का पार्थिव शरीर संत निरंकारी कॉलोनी में अंतिम दर्शनों के लिए 30 जनवरी से लेकर 1 फरवरी प्रातः 11ः00 बजे तक रखा गया। इसके पश्चात् उनकी अंतिम यात्रा से पहले संत निरंकारी मण्डल के लगभग सभी पदाधिकाकरयों की ओर से ’सत्यार्थी’ जी का शॉल तथा फूलों द्वारा सम्मान किया गया। सद्गुरु माता जी जो 31 जनवरी को मुम्बई से विशेष तौर पर पधारे थे, उन्होंने भी ’सत्यार्थी’ जी के पार्थिव शरीर पर पुष्प भेंट करके उन्हें विदाई दी।

इसके पश्चात् ’सत्यार्थी’ जी का पार्थिव शरीर एक फूलों से सजे खुले वाहन पर रखा गया और शोभा यात्रा के रूप में निगम बोध घाट तक ले जाया गया जहां सी.एन.जी. शवदाह गृह पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। शोभा यात्रा में सबसे आगे सेवादल के सदस्य रहे और उनके पीछे संत निरंकारी मिशन के वरिष्ठ पदाधिकारी चल रहे थे जबकि उनके पीछे-पीछे पालकी आ रही थी।

अंतिम संस्कार ’सत्यार्थी’ जी के सुपुत्र विमलेश आहूजा जी द्वारा किया गया। विमलेश जी तथा उनकी बहन अरूणलता जी तथा उनका समस्त परिवार मिशन के भक्त हैं और सेवा, सत्संग, सुमिरण में पूर्ण आस्था रखते हैं।