NEW DELHI,14.08.18-वृद्धा अवस्था में घुटने की मुश्किल से मुश्किल परेशानी का इलाज अब सब नई तकनीक के द्वारा संभव हो गया है। जींद के 70 वर्षीय दो मरीजों की फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमारबाग, दिल्ली में ’’फास्टट्रैक नी रिप्लेसमेंट’’ सर्जरी (टोटल नी रिप्लेसमेंट) की गई और दोनों सफलता पूर्वक अपनी सामान्य दिन चर्या में लौट गए। एक मरीज का 1987 में दुर्घटना के मामले में पहले भी ऑपरेशन हो चुका था जब कि दूसरे को पिछले 15 वर्षाें से अत्यधिक दर्द और मुश्किल का सामना करना पड़ रहा था। सर्जिकल टीम केे डॉ. अमित पंकज अग्रवाल, निदेशक, ऑर्थोपेडिक्स एवंज्वॉइंट रिप्लेसमेंट, फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमारबाग, दिल्ली के नेतृत्व में इस सर्जरी को अंजाम दिया।
हरियाणा जींद के रहने वाले 70 वर्षीय नेहरू मलिक जिनकी 1987 में दुर्घटना हुई थी जिसमें उनका बायां घुटना गंभीर रूप से घायल हो गया था। उन्होंने इसके लिए सर्जरी भी कराई लेकिन टहलते हुए उनके बाएं पैर में अत्यधिक दर्द का सामना करना पड़ रहा था। जब उन्हें सर्जरी के लिए लाया गया तो वह ऑर्थराइटिस और गंभीर विकृति से पीड़ित थे जिससे उनकी दैनिक गतिविधि सीमित हो गई थीं। पिछली दुर्घटना के बाद कराए गए ऑपरेशन के कारण मलिक के लिए घुटना प्रत्यारोपण में चुनौती थी क्योंकि उनमें संक्रमण और जटिलताओं का खतरा भी अधिक था। उन्होंने विभिन्न अस्पतालों से संपर्क किया जहां मामले की गंभीरता और संभावित जटिलता को देखते हुए उपचार करने से इनकार कर दिया गया। व्यापक तौर पर इस मामले का अध्ययन करने के बाद डॉ. अमित पंकज अग्रवाल ने टोटल नी रिप्लेसमेंट (टीकेआर) में अपने अनुभव के आधार पर यह चुनौती स्वीकार की और ’’ फास्टट्रैक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी’’ तकनीक के साथ मरीज के बाएं घुटने का ऑपरेशन किया। यह ऑपरेशन न सिर्फ सफल रहा बल्कि वह सर्जरी के कई महीने बाद अब सामान्य महसूस कर रहे हैं।
ऐसी ही स्थिति दूसरे मरीज, 70 वर्षीय राजबीर सिंह को दोनों घुटनों के जोड़ में दर्द, सूजन और विकार की शिकायत के साथ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। वन विभाग, हरियाणा के सेवा निवृत्त कर्मचारी श्री सिंह करीब दो दशक पुराने अपने पुराने दिनों को याद कर रहे थे जब वह अपनी साइकिल पर सवार होकर काम पर आते-जाते थे। 2001 में उनके घुटने खराब होने शुरू हुए और मजबूरन उन्हें अपने इस साथी यानी अपनी साइकिल को छोड़ना पड़ा। 2003 में उनके घुटनों की हालत और बिगड़ने लगी वे अपने दैनिक कार्यों को निपटाने में भी मुश्किलें महसूस करने लगे। जांच के बाद सिंह को दोनों घुटने बदलवाने की सलाह दी गई और सर्जरी के छठे दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सिंह अब अपनी साइकिल चला सकते हैं और सर्जरी के 10 महीने बाद, अपने रोज के काम काज आसानी से पूरे करने में सक्षम हैं।
डॉ. (प्रोफेसर) अमित पंकज अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि, ’’ नेहरू मलिक का मामला उनकी पुरानी दुर्घटना और सर्जरियों के कारण खास तौर पर चुनौती पूर्ण और जटिल था। हमने गाइरोस्कोपिकनेविगेशन के साथ फास्ट-ट्रैक नी रिप्लेसमेंट का विकल्प चुना जो टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी में बहुआयामी दृष्टि कोण् है। इसमें मरीजों को व्यवस्थित जटिलताओं को कम करने और तेज एवं बेहतर सुधार के लिए जितनी जल्दी हो उतनी जल्दी (4 से 6 घंटे के भीतर) तैयार किया जाता है। राजबीर सिंह के मामले में हमने दोनों घुटनों को बदलने का विकल्प चुना जिसका मतलब था दोनों घुटनों का एक साथ प्रत्यारोपण। यह तकनीक सुधार की प्रक्रिया को तेज और बेहतर बनाती है। फास्ट-ट्रैक नी रिप्लेसमेंट या ’’इन हैंस्डरिकवरीपाथवे’’ नी रिप्लेसमेंट के क्षेत्र में नया दृष्टि कोण है। सबसे अहम लाभ यह है कि जोड़ों के दर्द और घुटने की गंभीर समस्या से पीड़ित सेहतमंद मरीजों को फास्ट-ट्रैक किया जा सकता है जिन्हें अत्यधिक विषेशीकृत एवं तकनीकी रूप से आधुनिक प्रक्रियाओं के अंतर्गत ऑपरेट किया जाना है, मामूली दर्द के साथ कम समय में डिस्चार्ज किया जाता है।