चंडीगढ़, 17 अगस्त: इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने भाजपा सरकार के उस दावे की कड़ी निंदा कि जिसमें हवाला दिया गया है कि सरकार ने कर्मचारियों को नियमित करने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में अन्य राजनीतिक दलों के एकमत से दायर की है। उन्होंने कहा कि इनेलो प्रतिनिधि ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने पर असहमति जताई थी इसलिए इनेलो पार्टी सरकार के उपरोक्त दावे का खण्डन करती है।
इनेलो प्रदेशाध्यक्ष ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा बलदेव राज महाजन की अध्यक्षता में बुलाई गई विशेष दलों की बैठक में इनेलो प्रतिनिधि ने इस प्रकार के किसी भी सुझाव पर सहमति नहीं जताई जो कर्मचारियों के हित में न हो। बावजूद इसके इनेलो यह समझने में असमर्थ है कि सरकार द्वारा कर्मचारियों को विधानसभा में बिल लाकर नियमित करने का फैसला कब और किस प्रभाव में बदला गया?
इनेलो नेता ने स्पष्ट किया कि इनेलो सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के फैसले से इतेफाक नहीं रखती और न ही इसका समर्थन करती है। उन्होंने मांग की कि हरियाणा सरकार विधानसभा में बिल पारित कर उच्च न्यायालय द्वारा के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों को नियमित करे ताकि स्थाई नौकरी से उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
अरोड़ा ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी की गई है जिसमें तथ्यों को तोड़ मरोडक़र पेश किया गया है। उन्होंने सरकार के इस कदम को इनेलो की छवि खराब करने के साजिश बताते हुए इस फर्जी दावे को तुरंत प्रभाव से वापस लेने के लिए भी कहा।