चंडीगढ़, 22 अक्तूबर: नेता विपक्ष अभय सिंह चौटाला, बसपा प्रदेशाध्यक्ष प्रकाश भारती और इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा की अगुआई में इनेलो-बसपा शिष्टमण्डल ने राज्य के किसानों से संबंधित अनेक मुद्दों बारे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में ध्यान दिलाया गया है कि सितम्बर माह के अंत में भारी बारिश के कारण धान, बाजरा और कपास की फसलों को विशेष रूप से हानि हुई थी जिस कारण यह आवश्यक था कि सरकार तुरंत एक स्पैशल गिरदावरी के आदेश देती और प्रभावित किसानों को कम से कम 25 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देती। इसके अतिरिक्त उन बारिशों के कारण खेतों में पानी भी भर गया था जिसे निकालने के लिए पम्पों की आवश्यकता थी। किसानों और राज्य के हित में सरकार से यह मांग की गई थी कि वह अपने खर्चे पर किसानों को पम्प उपलब्ध करवाए ताकि खेतों से पानी को निकाला जा सके। ऐसा न करने की स्थिति में यह संभावना है कि रबी की फसल की बिजाई तक वह खेत अगली फसल के लिए तैयार नहीं किए जा सकते। इसका किसानों की अर्थ व्यवस्था पर कैसा विपरीत प्रभाव पड़ेगा यह सभी किसान भलीभांति समझते हैं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि किसान एक ऐसे वर्ग से संबंधित है जिसके पास आय तभी आती है जब फसलें तैयार होकर बाजार में बिकती हैं। यह बड़े खेद की बात है कि इस वर्ष भी पिछले कुछ वर्षों की तरह ही एक ऐसा चलन मंडियों में चल रहा है जिसके तहत किसानों की फसल में से धान में नमी की आड़ में भारी कटौती की जाती है। विडंबना यह है कि सरकार ने अभी हाल में ही धान के समर्थन मूल्य में वृद्धि की घोषणा बड़े धूमधमाके के साथ की थी परंतु जब इस प्रकार के बहानों की आड़ में कटौती की जाती है तो किसान हितैषी होने का दावा खोखला सिद्ध हो जाता है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि मंडियों में खरीद करने वाली सरकारी एजेंसियों की सांठगांठ की राइस मिलरों के साथ है जिस कारण कभी नमी की आड़ में किसानों का शोषण होता है तो कभी तोलने में धांधली की जाती है। केवल धान उत्पादों का शोषण ही इन मंडियों मेंं नहीं किया जाता क्योंकि इसका शिकार बाजरा और कपास उत्पादक भी हैं। यह एक विचित्र संयोग है कि जब बाजरे की फसल को लेकर किसान मंडी में पहुंचता है तो यह खरीद एजेंसियां मौके से गायब होती हैं जिस कारण किसान को मजबूरी में औने-पौने दाम पर अपनी फसल बेचनी पड़ती है। जाहिर है कि इन उदाहरणों से यह सिद्ध हो जाता है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में घोषित की गई वृद्धि मात्र एक ढकोसला है और सरकार के संरक्षण में किसानों का शोषण निरंतर जारी है।
इनेलो ने यह भी मांग की है कि राज्य में चीनी मिलों द्वारा गन्ने की खरीद को बंद किए छह महीने से अधिक का समय हो गया है परंतु दुर्भाग्य की बात यह है कि अभी तक इन निजी चीनी मिलों द्वारा किसानों के उत्पाद का भुगतान नहीं किया गया है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए इनेलो द्वारा मांग की गई है कि तुरंत स्पैशल गिरदावरी करवाई जाए, 25 हजार रुपए प्रति एकड़ का मुआवजा उन किसानों को दिया जाए जिनकी फसल सितंबर माह की बारिश के कारण खराब हुई, मंडियों में नमी, कम तुलाई और अन्य कारणों से हो रहे शोषण को बंद कर उन्हें पूरा घोषित समर्थन मूल्य दिया जाए और गन्ना किसानों का पिछला भुगतान तुरंत दिलवाया जाए। ऐसा न करने की स्थिति में इनेलो को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा जिसके परिणामों की जिम्मेवारी पूरी तरह से सरकार पर होगी। नेता विपक्ष ने धान के अवशेष जलाने को लेकर किसानों पर दर्ज मामले वापिस लेने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को इस समस्या से निपटने के लिए आर्थिक सहायता व तकनीक मुहैया करवाए।
इनेलो वरिष्ठ नेता ने रोडवेज कर्मचारियों द्वारा की जा रही हड़ताल पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि आम जनता की परेशानियों के मद्देनजर इस समस्या का जल्द ही हल निकाला जाए। उन्होंने कहा कि सरकार सभी कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई को वापिस ले और एस्मा को समाप्त कर जनजीवन को सामान्य करने वाला फैसला ले। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार निजी बसों के बजाय सरकारी बसों की संख्या में बढ़ौतरी करे।
ज्ञापन के दौरान पूर्व सीपीएस रामपाल माजरा, बसपा प्रदेशाध्यक्ष प्रकाश भारती, सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी व रामकुमार कश्यप, सभी विधायकगण, आरएस चौधरी व प्रवीण आत्रेय भी मौजूद थे