चण्डीगढ़, 19.01.26 : समाजसेवी राजबीर सिंह ने चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण और सीपीडीएल कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं के शोषण के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई है। उन्होंने प्रशासन के उस फैसले पर कड़े सवाल खड़े किए हैं, जिसके तहत मुनाफे में चल रहे सरकारी बिजली विभाग को एक निजी कंपनी के हाथों सौंप दिया गया। बिजली विभाग 2020-21 में 365.11 करोड़ फायदे में था। राजबीर सिंह ने सवाल उठाया कि जब चंडीगढ़ बिजली विभाग पहले से ही करोड़ों रुपये के मुनाफे में चल रहा था, तो उसे एक निजी कंपनी सीपीडीएल को सौंपने की क्या आवश्यकता थी? "अपनी फायदे वाली चीज़ को कोई नहीं बेचता, फिर प्रशासन ने जनता के हितों की बलि क्यों दी?" उसे निजी हाथों में क्यों बेचा गया? यह सीधा-सीधा जनता की संपत्ति को पूंजीपतियों के हवाले करने जैसा है।

*राजबीर सिंह ने प्रेस को जारी बयान में निम्नलिखित मुख्य बिंदु उठाए:

*स्मार्ट मीटर या 'लूट' का मीटर: उन्होंने आरोप लगाया कि जब से सीपीडीएल ने नए 'स्मार्ट मीटर' लगाए हैं, बिजली के बिलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। ये मीटर पुराने मीटरों के मुकाबले कहीं अधिक तेज भाग रहे हैं। वर्षों से बिजली के रेट नहीं बढे थे पर निजीकरण के बाद कम्पनी लगातार रेट बढा रही है जिसका कंज्यूमर पर आर्थिक बोझ लगातार बढता जा रहा है।

*महीने वार बिलिंग - एक चाल:
कंपनी द्वारा हर महीने बिल भेजने के फैसले को राजबीर सिंह ने एक 'मनोवैज्ञानिक खेल' करार दिया। उन्होंने कहा कि दो महीने का भारी बिल देखकर जनता में आक्रोश न फैले, इसलिए अब उसे किस्तों में (हर महीने) वसूला जा रहा है ताकि लूट का अहसास कम हो।

*पुराने मीटरों की वापसी की मांग: उन्होंने पुरजोर मांग की है कि इन कथित स्मार्ट मीटरों को हटाकर दोबारा पुराने मीटर लगाए जाएं। जब पुराने मीटरों के रहते हुए भी विभाग मुनाफे में था, तो जनता पर इन महंगे और तेज मीटरों का बोझ क्यों लादा जा रहा है?

*भारतीय समाजसेवी राजबीर सिंह ने आज चंडीगढ़ के बिजली विभाग के निजीकरण और उसके बाद उपभोक्ताओं को आ रही समस्याओं पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि बिजली विभाग के निजीकरण के फैसले और नए 'स्मार्ट मीटरों' की कार्यप्रणाली की तुरंत समीक्षा की जाए।