चंबा, सितंबर 22-हिमाचल प्रदेश विधानसभा के उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने आज मां शिव-शक्ति के छतराड़ी स्थित ऐतिहासिक मंदिर परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय जात्र मेले में भाग लिया। केवल सिंह पठानिया ने इस दौरान पारंपरिक गद्दी वेशभूषा चोला-डोरा पहनकर माँ-शिवशक्ति की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की भी कामना की। उन्होंने इस अवसर पर लोक परंपरा के अनुसार शहनाई, ढोल-नगाड़ों की मधुर स्वर लहरियों के बीच स्थानीय लोगों के साथ डंडारस लोक नृत्य में भी भाग लिया।
उप मुख्य सचेतक ने कहा कि देवभूमि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक-कला एवं संस्कृति की अपनी विशिष्ट पहचान है। यहां की समृद्ध लोक परंपराएं, पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत पीढ़ियों से हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं।
उन्होंने कहा कि चंबा जिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, यहां के लोगों तथा पारंपरिक वेशभूषा के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्होंने कहा कि चंबा की पावन धरती और यहां के लोगों पर भगवान शिव-शक्ति का विशेष आशीर्वाद है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का छतराड़ी जात्र मेले को राज्य स्तरीय दर्जा प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस निर्णय से मेले की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को व्यापक पहचान मिली है।
केवल सिंह पठानिया ने इस दौरान जात्र मेले में भाग लेने वाले लोकनाट्य दलों के प्रतिभागियों को सेलो ग्लास वेयर भी वितरण किए ।
उन्होंने इस दौरान जिले में क्षय रोग के उन्मूलन के लिए लोगों से निक्षय मित्र बनने का आग्रह भी किया।
सदस्य निदेशक मंडल, राज्य पथ परिवहन निगम एवं अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी सुरजीत भरमौरी, अध्यक्ष, हज कमेटी दिलदार अली वट्ट, महासचिव प्रदेश कांग्रेस कमेटी अमित भरमौरी, प्रधान ग्राम पंचायत छतराड़ी रिंकू भारद्ववाज, उप मंडल दंडाधिकारी नागरिक चिराग शर्मा, अधिशासी अभियंता एचपीटीसीएल राज सिंह, विद्युत बोर्ड हंसराज, जिला भाषा अधिकारी तुकेश शर्मा, खंड विकास अधिकारी डॉ. बशीर खान, जिला कार्यक्रम अधिकारी स्वास्थ्य डॉ. हरित पुरी, उपनिदेशक पशुपालन डॉ. राकेश कुमार, उपनिदेशक उद्यान डॉ. प्रमोद शाह सहित विभिन्न विभागीय अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय से 48 किलोमीटर दूर छतराड़ी स्थित मां शिव-शक्ति मंदिर क्षेत्रवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। एक स्तंभ पर घूमने की अद्भुत स्थापत्य विशेषता और इससे जुड़े रहस्य समेटे इस मंदिर का निर्माण मान्यता के अनुसार लगभग 780 ईस्वी पूर्व हुआ था। मंदिर से जुड़ी प्राचीन धार्मिक परंपराएं आज भी स्थानीय लोक संस्कृति और आस्था का अभिन्न हिस्सा हैं। राधाष्टमी के दूसरे दिन से यहां चार दिवसीय जात्र मेले का आयोजन किया जाता है। श्री मणिमहेश डल झील से पवित्र जल लाकर मां की मूर्ति को स्नान करवाया जाता है। इसके पश्चात विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। माता शिव-शक्ति को समर्पित यह ऐतिहासिक मेला क्षेत्र की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का भी परिचायक है। खप्पर बुढ़ा नृत्य (मुखौटा नृत्य) और पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुत डंडारस लोकनृत्य इसके प्रमुख आकर्षण हैं। पारंपरिक चोले-डोरे, लंबी टोपी और कलगी धारण किए प्रतिभागियों की मनोहारी प्रस्तुति देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।